आपसी प्रेम भाई चारा सबसे बरा समाजसेवा है

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Dosto यहाँ हम आपको ऐसे ही , कूछ मोटिवेशन पोस्ट लिख रहा हूँ , जो आज के भरतीय समाज के लिये , एक प्रेरणा बनेगी ,

मित्रो असल में समाजसेवा केसे होना चाहिये अगर हमारे पास धन न हो,बल न हो,न ही बुद्धि,योग्यता और सामर्थ्य ना हो,तब भी हम दूसरों की सेवा कर सकते हैं,सेवा करने का अर्थ होता है,दूसरे का हित करना और उसे प्रसन्नता प्रदान करना,हृदय से किसी के दुःख में दुखी होना या किसी के सुख में प्रसन्न होना भी एक तरह से सेवा ही है,

जब आप किसी के दुःख में सम्मिलित होते हैं तो उसका दुःख कम होता है और इस तरह आप उसका दुःख कम करने में सहायता कर के उसकी सेवा ही करते हैं,अक्सर हम लोग सोचते हैं कि हमारे पास धन है तभी हम दूसरों की सेवा कर सकते हैं,


इस प्रकार सोच कर आप अधिक महत्व धन को दिया,सेवा का कोई महत्व ही नहीं दिया,धन तो हाथ का मैल होता है,आज है कल नहीं है,आजकल दुसरो से दान लेकर आगे दान देने का प्रचलन जोर पर है,लोग दूसरों के धन से सेवा करते हैं फिर भी मन में अभिमान की भावना रहती है,इससे बरा महापापी कोई नहीं होता साथ ही उस व्यक्ति पर रोब भी जमाने लगते हैं कि हमने तुम्हारे ऊपर कितना पैसा खर्च कर दिया,हमनें तुम्हारी कितनी आर्थिक मदद की,आदि-आदि,,


मित्रो बरी सर्म की बात है जब कोई आपके सेवा के बदले नाम जप में लग जाता है तो आप सेवा करने को राजी होते हैं,लोगों में वहम होता है कि धन होने पर हम ऐसे सेवा करेंगे,वैसे सेवा करेंगे,पर क्या वास्तव में धन होने पर हम सेवा करते हैं,






बल्कि धन आने पर हमारी प्राथमिकता बदल जाती है,मित्रो वास्तव में सेवा का अर्थ अपना महिमा मनडित कराना नहीं है बल्कि निस्वार्थ भाव से दूसरों की मदद करना है,सेवा वस्तुओं से नहीं बल्कि हृदय से होती है,किसी भी तरह से,किसी के भी द्वारा सेवा का कार्य हो जाए और सेवा करने वाले और सेवा पाने वाले दोनों को देख कर खुश होना भी सेवा ही है,






जब तक हम दूसरों के दुःख में दुखी और सुख में सुखी नहीं होंगे तो सेवा कैसे कर पायेंगे,जो दूसरों के दुःख से दुखी होगा ,वह अपना सुख दूसरों को देगा स्वयं उस सुख को नहीं लेगा और दूसरों के सुख से सुखी होगा तो स्वत: ही उसका सुख दोगुना हो जाएगा,


इस प्रकार ही सच्ची सेवा होगी क्योंकि संसार से मिली हुई सामग्री को अपनी मानकर सेवा करने से अभिमान आता है और सेवा नही होती, असली सेवा के लिए तो हृदय की जरूरत है।

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