पिता का पत्र(Letter) बेटे का नाम,Motivation Article 

0

आज फ़िर हम anytechinfo.com पर एक मोटिवेशन पोस्ट लिख रहे है , इसमे मैने अपने बेटे को एक पत्र लिखा है ,

प्यारा बेटा पुस्कर,,

अभी तुम सत्रह(17) साल के हो,उम्र के जिस मुकाम पर हो तुम पढ़ कर कुछ भी बन सकते हो,तुम अच्छी तरह समझ सकते हो कि मैं तुम्हें इस चिठ्ठी में क्या बताने जा रहा हूँ,
तुम्हारे सामने तुम्हारा पूरा जीवन पड़ा हुआ है,यह ज़िंदगी ने मुझे भी बहुत कुछ सिखाया है,मैं नहीं चाहुगा एक पिता के रूप में कि तुम अपने ज़िंदगी में मेरे जैसा इम्तिहानों का सामना करो,आज तुम्हें शायद मेरे इस चिठ्ठी में लिखी बातें समझ में नहीं आयें लेकिन एक दिन तुम सारी बातो को समझ कर भी कुछ नहीं कर पाओगे,मुझे उम्मीद है कि तुम्हें पढाई का महत्व और मूल्य मुझे देखकर जान जाओगे,
बेटा तुम अभी छोटे हो और अभी ज़िंदगी अपनी तमाम दुश्वारियों,नाकामियों,उदासी,अकेलेपन,बैचैनी,और जोखिमों को तुमपर उतारने के मौके तलाश रही है,अभी तुम मेरे जैसे दिन-रात खटनेवाले कामों में खुद को नहीं झोंका है,


जिसके लिए कोई कभी भी शुक्रिया का एक शब्द भी कहने बाला कोई नहीं था,अभी तुमने रोज़मर्रा पड़नेवाले पत्थरों की बौछार नहीं झेला है,नहीं देखा है अभी तुम जिस दौर में हो उसके लिए शुक्रगुजार रहो की ये तुम्हारी ज़िंदगी के सबसे शानदार लम्हे दिन हैं,आगे तुम्हारे ज़िंदगी में और भी रंग-भरे मौसम आयेंगे,जिनकी धूप-छाँव से भी तुम्हें दो-चार होना होगा,


मैं उम्मीद करता हूँ कि मैं तुम्हें अपनी ज़िंदगी के सिखाये सबक भरी राह से रूबरू कराता चलूँगा,मेरा हर सलाह को तुम नाप-तौलकर ही मानना,यह ज़रूरी नहीं है कि जो कुछ मेरे लिए अच्छा रहा हो वह तुम्हारे लिए भी वैसा ही होगा,ज़िंदगी निर्मम भी हो सकती है,


तुम्हें ऐसे लोग भी मिलेंगे जो समाज में बिल्कुल अच्छे नहीं हैं,वे तुम्हें सिर्फ इसलिए भी सता सकते हैं कि तुम भले बच्चे हो,वे तुम्हें कभी भी गिरा सकते हैं,चोट भी पहुंचा सकते हैं,तुम ऐसे लोगों को अपना दोस्त बनाना जो तुम्हारी परवाह करें और तुम्हारे भीतर हौसला और ख़ुशी पैदा करें,जब तुम्हें अच्छे दोस्त मिलें,तुम उन्हें खजाने की तरह अहतियात से अपने करीब रखना,उनके साथ वक़्त गुजारना,उनसे प्रेम करना,अपने से उच्च बिचार बाले से मित्रता करना,ज़िंदगी में


ऐसे कई मौके आयेंगे जब सफलता तुमसे दूर होगी और दिल में निराशा घर कर लेगी,ज़िंदगी में सब कुछ हमेशा तुम्हारे हिसाब से नहीं होगा,यह भी ऐसी बात है जिससे जूझना तुम्हें सीखना होगा,असफलता का सामना जरूर करना और उससे अपने सपने सच कर दिखाने की सीख लेना,अपनी कमजोरियों को अपनी ताक़त में बदल देना,फिर बेटा तुम ज़िंदगी में बहुत बेहतर करोगे,


कभी ऐसा भी होगा कि जिनको तुम चाहोगे वे तुमसे दूर हो जायेंगे और तुम्हारा दिल टूट जायेगा,मैं तो चाहता हूँ कि ऐसा न हो लेकिन ये सबके साथ होता है,इसमें भी तुम कुछ ख़ास नहीं कर सकते बजाय इसके कि तुम ज़िंदगी की राह पर आगे बढ़ चलो,अपने दर्द को सीढ़ी बनाकर तुम अच्छी चीज़ों की ओर चल पड़ना,इनसे भी तुम्हें कुछ सबक ज़रूर मिलेंगे,अपने अनमोल जीवन को स्वीकार करते रहो,”हाँ” यह सच है कि ज़िंदगी में दुःख-दर्द कदम-कदम पर आते रहते हैं,लेकिन तुम इनके कारण ज़िंदगी से मुंह नहीं मोड़ना. ज़िंदगी से भागना नहीं,



किसी कोने में कभी भी मत दुबकना,नई बातों,अनुभवों,और लोगों का स्वागत करना,ज़िंदगी के सफर में अक्सर ऐसे लोग टकराएेगे जो तुम्हें झुझलायेगे,ज़िंदगी में कई बार हारोगे लेकिन यदि तुम बार-बार कोशिश नहीं करोगे तो कामयाबी की चोटी पर पहुँचने के बाद के अहसास को खो दोगे,असफलता हमारी राह का वह पत्थर है जिसपर पैर रखकर हम कामयाबी के कुछ करीब पहुँच जाते हैं,


बेटा ज़िंदगी कोई रेस नहीं है,स्कूल,कॉलेज,में तुम्हें महंगी कार,कपड़े,फोन,और बड़े घर बाले मित्र अधिक मिलेगे अगर उसके पिछे थोरा भी नजर दिया ज़िवन नर्क जैसा हो जायेगा,तुम जितना में हो उसमें ही संतुष्ट रहने की आदत डालना,जितना वक़्त तुम इन चीज़ों के पीछे भागने में लगाओगे उसे उस काम में लगाना जिसे करने से तुम्हें ख़ुशी मिले,अपने हर शौक पूरे करना,पहले पढाई फिर आपसी प्रेम का पाठ जरूर पढना,दुसरे का धन पर कभी नजर मत रखना,मेरा एकमात्र शब्द याद रखना,


जिसके लिए तुम ज़िंदगी जिना,वह शब्द है ‘प्रेम’. शायद तुम्हें यह अजीब लगे पर यह एक शब्द जीवन में जरूर याद रखना,मैं कुछ असामाजिक लोगों से भी मिला,वैसे लोगो को सिर्फ़ सफलता और धन ही ज़िंदगी का कायदा दिखाई देता है,मेरे समझ से वैसे पापी की ज़िंदगी बोझिल,नाखुश,और सतही होती है,मुझे तो कुछ लोग ऐसे भी मिले खुद को ही हर चीज़ से बड़ा मानते हैं,वे चाहेंगे कि उन्हें ही हमेशा सब कुछ सबसे पहले मिले उनकी ज़िंदगी में अकेलापन होगा,वे कभी भी खुश नहीं रहेंगे और कुछ ऐसे भी होंगे जिनके लिए जिन्दगी नेकी का ही दूसरा नाम होगी,ऐसे लोग दूसरों को सच्चाई का रास्ता दिखायेंगे,बेटा यह पत्र समभाल कर रखना साथ ही मेरे सारे बातो को जहन में ऊतारने की कोशिश करना,तुम अपने जीवन में बस प्रेम ही एकमात्र बातो को याद रखना,अपने बाबा-मामा माता-पिता,गुरू,चाचा-चाची दोस्तों से दिल की गहराई से प्रेम करना,सिर्फ अपने परिजनों से ही नहीं बल्कि अपने पड़ोसियों,सहकर् <


/span>मियों,और अजनबियों से भी प्रेमपूर्ण व्यवहार करना,मनुष्य होने के नाते सभी तुम्हारे भाई-बहन हैं,सभी से मुस्कुराते हुए मिलना,अपनी वाणी मधुर रखना,विनयशील के साथ लाचार लोगो के प्रती मदद का हाथ जरूर बढ़ाना,दूसरे जो भी तुम्हारी आलोचना करें तो खुद के प्रति निर्ममता मत बरतना,यह कभी मत सोचो कि तुम बदसूरत या कमअक्ल या प्यार के काबिल नहीं हो,बल्कि यह सोचो कि तुम एक बेहतरीन इंसान हो और तुम्हारे हिस्से में भी खुशियाँ और प्रेम है,तुम जैसे हो वैसे ही खुद को प्रेम करो,आखिर में बेटा तुम्हें यह पता होना चाहिए कि मैं तुमसे सच्चा प्रेम करता हूँ और हमेशा करता रहूँगा,


तुम्हारे जीवनयात्रा बहुत अपरिमित,अस्पष्ट,और दुरूह होने जा रहा है,यह तुम्हारे ज़िवन का विहंगम यात्रा है,मैं इस यात्रा में सदैव तुम्हारे साथ रहने का प्रयास करूंगा,मुझे माता जगतमयी जगदम्बा पर पुरा भरोसा है,माता रानी तुम्हारा मार्ग जरूर प्रशस्त करेगी “शुभाशीष” बेटा पुस्कर प्रियदर्शी (जोंटी)

तुम्हारा पापा, – सुभाष कुमार ईश्वर “कंगन”

LEAVE A REPLY